जिप्सम

जिप्सम

जिप्‍सम का परिचय:जिप्‍सम दो रूपों अर्थात खनिज जिप्‍सम एवं उत्‍पाद-जिप्‍सम के रूप में उपलब्‍ध है | खनिज जिप्‍सम भूगर्भ से खोदकर प्राप्‍त किया जाता है | उत्‍पाद-जिप्‍सम में प्रमुख रूप से समूद्री जिप्‍सम, फोसफो जिप्‍सम, फ्लोरो जिप्‍सम, बोरो जिप्‍सम, स्‍क्रवर जिप्‍सम ईत्‍यादि शामिल है | सामान्‍य नमक के उत्‍पादन के दौरान समुद्री जिप्‍सम समुद्र के पानी से एक उत्‍पाद के रूप में प्राप्‍त किया जाता है | जबकि अन्‍य प्रकार के उत्‍पाद विभिन्‍न रासायनिक सयंत्रो से सह-उत्‍पाद के रूप में प्राप्‍त किये जाते हैं |

 

भारत में उपलब्‍ध खनिज जिप्‍सम की गुणवता बहुत असंगत है और समान प्रकार के डिपोजिट में केल्सियम सल्‍फेट का प्रतिशत भी भिन्‍न भिन्‍न होता है | उच्‍च श्रेणी के जिप्‍सम 80 प्रतिशत केल्सियम सल्‍फेट सामग्री से युक्‍त एवं अन्‍य प्रायः 1 : 3 के अनुपात में होता है | जिप्‍सम की गुणवता भी कणों के आकार पर निर्भर करती है | बडे़ कण आम तौर पर केल्सियम सल्‍फेट के उच्‍च प्रतिशत के होते है | केल्सियम सल्‍फेट की सामग्री के ढ़ेर (5 सेमी ऊपर) और बढि़या किस्‍म में (5 सेमी से कम) के बीच औसत अन्‍तर में काफी भिन्‍नता पाई जाती है और यह आमतौर पर 6 प्रतिशत के स्‍तर पर रहती है | जॉच में आगे यह पता चला है कि सिलिका युक्‍त यह सामग्री आसानी से चूर-चूर और छोटे-छोटे टुकडो़ में (5 सेमी से ऊपर) विभक्‍त हो जाती है | जिसमें कि केल्सियम सल्‍फेट पर और अधिक केन्द्रित है |

 

जिप्‍सम केल्सियम या मैग्निश्यिम कार्बोनेट, क्‍लोराइट अन्‍य सल्‍फेट खनिज, मिट्टी खनिज या सिलि‍का हानिकारक तत्‍व के रूप में माने जाते है बहुत से खान उत्‍पादनों में जिप्‍सम का एक परिणाम के रूप में गुणवता 70 से 95 प्रतिशत के बीच होगी | अक्‍सर यह प्रयोग खानों में हालाकि कि कुछ मामलों में खनिज परिष्‍करण के एक या एक से अधिक तरीको को उत्‍पाद उन्‍मुलन के लिए प्रयोग किया जाता है |

 

जिप्‍सम की खनिज विद्याः खनिज जिप्‍सम स्‍वाभाविक रूप से प्रकट होने वाले सल्‍फेट खनिजों में सबसे आम है | इसमें 70 प्रतिशत केल्सियम सल्‍फेट की एक रचना के साथ निर्जलीकरण एवं 21 प्रतिशत पानी है |

निर्जलीय (CaSo4) भी एक स्‍वाभाविक रूप में प्राकृतिक सल्‍फेट खनिज है | जोकि बिना पानी के रवाकरण है | शुद्व जिप्‍सम में Cao : 32.6 प्रतिशत So3 : 46.5 प्रतिशत एवं H2O : 20.9 प्रतिशत होता है|

 


जिप्‍सम के उपयोगः जिप्‍सम एक बहुत महत्‍वपूर्ण औधोगिक खनिज है जिसके बहुत उपयोग हैं | यह कैल्‍साइंड के रूप में व अनकैल्‍साइंड के रूप में उपयोग किया जा सकता है | अनकैल्‍साइंड जिप्‍सम मुख्‍य रूप से सीमेन्‍ट और उर्वरक के निर्माण में और क्षारीय भूमि सुधारक के रूप में एवं सल्‍फयुरिक एसिड के निर्माण में एवं रंग, रबर व कागज भराव इत्‍यादि के कार्य में प्रयोग किया जाता है | जिप्‍सम की कैल्‍साइड रूप का प्रयोग विभिन्‍न प्रकार के मकान निर्माण, जैसेः प्‍लास्‍टर, वाल-बोड, ब्‍लॉक आदि में किया जाता है | उधोगवार जिप्‍सम का प्रयोग नीचे दिया जा रहा हैः

 

 

  • सीमेन्‍ट
  • अमोनियम सल्‍फेट
  • सल्‍फेट एसिड
  • भूमि के प्‍लास्‍टर
  • फिलरस
  • सिरेमिकस
  • इन्‍सुलेटर
  • मेडीकल
  • भवन संघटक
  • कोयला खनन
  • ब्‍लेक र्बोड चौक
  • अन्‍य में

 

 

फेगमिल जिप्‍सम

कम्‍पनी वर्तमान में खनिज जिप्‍सम के खनन एवं विपणन में कार्यरत है| खनिज जिप्‍सम मुख्‍य रूप से मिट्टी के पोषक तत्‍व सल्‍फर के रूप में, क्षारीय भुमी सुधारक के रूप में एवं सीमेन्‍ट निर्माण के लिए कच्‍चा माल के रूप में प्रयोग किया जाता है|

फेगमिल राजस्‍थान राज्‍य के खनिज समृ) क्षेत्र में स्थित है जिसने बाडमेर, बीकानेर, जैसलमेर एवं श्रीगंगानगर जिले में जिप्‍सम जमा क्षेत्र का पहचान किया है| फेगमिल की 15 खाने राजस्‍थान राज्‍य के जैसलमेर, बाडमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जिलों में स्थित है|

वर्तमान में फेगमिल का जिप्‍सम उत्‍पादन 0.915 मिलियन टन है जो कि राज्‍य के कुल उत्‍पादन का 25 प्रतिशत है| वर्ष 2015-16 तक अनुमानित मांग वर्तमान स्‍तर 3.7 मिलियन टन प्रतिवर्ष से बढ़कर 4 मिलियन टन प्रतिवर्ष होने की संभावना है| फेगमिल नवीन खनन क्षेत्रों को प्राप्‍त करके और वर्तमान खानों की वार्षिक क्षमता को बढ़ाकर अपनी क्षमता में विस्‍तार करना चाहती है| वर्ष 2015-16 तक फेगमिल की वार्षिक उत्‍पादन क्षमता 0.915 मिलियन टन से बढ़कर 1.165 मिलियन टन होने की संभावना है|